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Raj Rameshwar Mandir Kahan Sathit Hai ? (राज राजेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है ?)

नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हम जानेंगे कि Raj Rameshwar Mandir Kahan Sathit Hai? हम इस लेख में राज राजेश्वरम् मंदिर के  इतिहास पर प्रकाश डालेंगे व इसकी विशेषताओं पर चर्चा करेंगे और आपको बताएंगे कि वहाँ तक किस तरह से पहुंचा जा सकता है। तो आईये शुरू करते हैं।

Raj Rajeshwar Mandir Kahan Sathit Hai ?

राजराजेश्वरम् मंदिर तमिलनाडु के तंजौर में स्थित है। तमिल भाषा में इसे बृहदेश्वर मंदिर के नाम से भी संबोधित किया  जाता है। यह एक हिंदू मंदिर है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित है। यूनेस्को ने इस मंदिर को विश्व धरोहर भी घोषित किया है। मंदिर में एक विशाल शिवलिंग और नंदी की विशाल प्रतिमा विराजमान है।

Ramanathaswamy Temple - Wikipedia

राज राजेश्वरम् मंदिर का इतिहास

माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1003 से 1010 ईस्वी के बीच चोल शासक “ प्रथम राज राज चोल”  ने करवाया था। उनके नाम पर ही इस मंदिर को राजराजेश्वरम् मंदिर का नाम दिया गया। इस मंदिर का निर्माण कार्य केवल 5 वर्षों में पुरा हो गया था। इस मंदिर की संरचना,उस समय की, विश्व की विशालतम संरचनाओं में से एक है।

पूरे विश्व में यह पहला और एकमात्र मंदिर है जो पूरी तरह से ग्रेनाइट का बना हुआ है। आपकी जानकारी के लिए बता दे की महाराजा राज राज चोल भगवान शिव के परम भक्त थे और उन्होंने इस भव्य मंदिर समेत शिव के कई अन्य मंदिरो का निर्माण भी करवाया था।

राज राजेश्वरम् मंदिर की बनावट

इस मंदिर की  भव्यता, वास्तु शिल्प, और केंद्रीय गुबंद की बनावट लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती है। इस मंदिर का परिसर विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर के भवन में 13 मंजिला है और भवन की ऊंचाई लगभग 66 मीटर है।

Ramanathaswamy Temple - Wikipedia

मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक चकोर मंडप बना है। उस मंडप के चबूतरे पर नंदी जी की प्रतिमा विराजमान है। नंदी जी की इस प्रतिमा की लंबाई 6 मीटर, चौड़ाई 2.6 मीटर तथा ऊंचाई 3.7 मीटर है। भारत में, नंदी जी की यह दूसरी सबसे विशाल प्रतिमा है, जो एक ही पतथर से बनी है।

राजराजेश्वरम् मंदिर की विशेषताएं

इस मंदिर के निर्माण कला की एक खास विशेषता है कि इसके गुबंद की परछाई पृथ्वी पर नहीं पड़ती। इस मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश स्थित है। माना जाता है कि जिस पाषाण पर यह कलश स्थित है, उसका भार लगभग 80 टन है। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण 216 फीट लंबा टॉवर भी है जो मंदिर के गर्भ गृह के ऊपर बनाया गया है। शहर में प्रवेश करते ही यह टॉवर दूर से भी दिखाई देता है।

इस मंदिर का रोमांचक पहलू इसकी दीवारों पर अंकित विशाल शिलालेख भी है। इस मंदिर पर वास्तुकला, प्रतिमा विज्ञान, चित्रांकन, नृत्य, संगीत, आभूषण, पाषाण व ताम्र पर शिल्पकारी की अपनी एक अलग ही विशेषता है। इस मंदिर की एक खासियत यह भी है कि यह पूरी तरह से ग्रेनाइट से बना है।

राजराजेश्वरम् मंदिर कैसे पहुंचे?

इस भव्य मंदिर तक हम By Air, By Road, By ट्रेन और जलमार्ग के मदद से आसानी से पहुँच सकते है। राजराजेश्वरम् मंदिर तमिलनाडु के  तंजौर में स्थित है और तंजौर का सबसे प्रमुख निकटतम शहर तिरुचिरापल्ली है। तिरुचिरापल्ली शहर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन दोनों हैं।

 आसपास के अन्य शहरों से भी तंजौर पहुंचने के लिए परिवहन के सभी साधन आसानी से उपलब्ध हो जाते है। यहां पर निजी और राज्य द्वारा संचालित बस सेवाएं भी उपलब्ध है। या फिर अपनी पसंद के अनुसार एक निजी टैक्सी बुक करके भी तंजौर पहुंचा जा सकता है।

राजराजेश्वरम् मंदिर में दर्शन करने का सबसे उतम समय

यह मंदिर तमिलनाडु राज्य में बना है, यहाँ पूरे साल उष्ण कटिबंधीय जलवायु रहती है साथ ही मॉनसून में हल्की बारिश रहती है और गर्मियों मे चिलचिलाती धूप रहती है। इसलिए राजराजेश्वरम् मंदिर की यात्रा करने का उपयुक्त समय सर्दियों का मौसम होता है।

मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातें/तथ्य

  • आपको यह जानकर हैरानी होगी कि राजराजेश्वरम् मंदिर का निर्माण 1,30,000 टन ग्रेनाइट से किया गया है, जबकि यहां आसपास के इलाकों में ग्रेनाइट नहीं पाया जाता। इतनी मात्रा में ग्रेनाइट कहां से लाया गया, यह  अब तक एक बड़ा रहस्य बना हुआ है, क्योंकि उस समय इतनी मात्रा में ग्रेनाइट लाना एक बहुत बड़ी बात है।
  • राजराजेश्वरम् मंदिर भारत के बड़े मंदिरों में से एक है और साथ ही यह चोल वंश की वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना भी है। इस मंदिर की खास बात यह है कि मंदिर के गुबंद की छाया धरती पर नहीं पड़ती। इसकी यही  चमत्कारी वास्तुकला पर्यटको को आकर्षित करती है।
  • रिज़र्व बैंक ने 1 अप्रैल 1954 को एक हजार का नोट जारी किया था। जिस पर राजराजेश्वरम् मंदिर की तस्वीर बनी थी। संग्राहकों में यह नोट बहुत लोकप्रिय हुआ।
  • इस मंदिर के एक हज़ार साल पूरे होने के उपलक्ष्य पर भारत सरकार ने एक हज़ार रुपए का स्मारक सिक्का जारी किया, जो 80%चांदी और 20% ताबें का बना है।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने जाना कि Raj Rajeshwar Mandir Kahan Sathit Hai? इस लेख में हमने आपको  मंदिर के इतिहास, निर्माण और विशेषताओं के बारे में जानकारियां दी।  यदि आप किसी अन्य मंदिर की जानकारी भी  चाहते हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं।

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